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प्रेम एक सर्वव्यापक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक शक्ति है, जो सूक्ष्मतम वस्तुओं से लेकर समस्त अनंत ब्रह्मांड तक को एकसूत्र में बांधती है और अस्तित्व के सभी पहलुओं से जोडती है।

जीवन के छिपे हुए आयाम
प्रोफेसर सादेग़ अंग़्हा पीर ओवैसी के द्वारा
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक केंद्र
क्या विद्युत चुम्बकीय केंद्र हैं?
इलेक्ट्रोमैग्नेटिक ऊर्जा सर्वव्यापी है। एमटीओ शाहमग़सउदी स्कूल ऑफ इस्लामिक सूफिज्म® के अनुसार, चुंबकीय बल का दूसरा नाम « प्रेम » है, जिससे संसार में भाईचारा फैलता है।

मानव शरीर में कई महत्वपूर्ण ऊर्जा केंद्र हैं। एमटीओ® स्कूल ऑफ इस्लामिक सूफिज्म इन केंद्रों में समन्वय करना सिखाता है जो किसी भी इंसान के बेहतरी और सेहत के लिए जरुरी है। सूफीवाद में इन केंद्रों को चुंबकीय स्त्रोत कहा जाता है। एक प्रमुख स्त्रोत जो हृदय में रहता है, उसे हज़रत शाहमग़सउद पीर ओबैसी ने जीवन-स्त्रोत कहा है। इसके साथ ही, बारह अन्य चुंबकीय स्त्रोत हैं। ये हैं: सोलर प्लेक्सज़, हृदय के तीन ग्रंथियां, थाईमस, गर्दन केंद्र, ब्रेन में तीसरा वेंट्रिकल, तीसरी आँख, ब्रेन का भूरा सतह, ब्रेन का आंतरिक फोंटनेल, ब्रेन स्टेम, और कॉक्किज़ । इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण चुंबकीय स्त्रोत, जीवन-स्त्रोत है, जो हमारे हृदय में होता है। लगभग सभी सूफी पद्धतियों में यह सबसे मूर्त होता है, जिस पर विशेष बल दिया जाता है और सभी कार्य हृदय के इसी बिन्दु पर केंद्रित होते हैं।

सबसे पहला और सबसे चुनौतीपूर्ण शिक्षण, जिसे छात्र महसूस करते हैं, जब उनका सामना पहली बार इससे होता है कि किसी को संवेदी प्रणाली पर पूर्णतया विश्वास नहीं करना चाहिए। सालों से हमें अपने संवेदी प्रणाली के आगमों पर विश्वास करना और इनके संकेतों के आधार पर क्रिया-प्रतिक्रिया करना सिखाया जा रहा है। चुनौती तब आती है जब सूफीवाद हमें अपनी बंधनयुक्त चिंतन प्रक्रिया से आगे बढकर इन संवेदी आगमों से सवाल करना सिखाता है। इसका कारण यह है कि, प्राचीन सूफी साम्राज्य के अनुसार, आगमों का संकेत केवल संवेदी प्रणाली नहीं बल्कि हमारे चुंबकीय केंद्र होने चाहिए।