logo
"“सर्वशक्तिमान परमेश्वर के पास अपने अज़ीम दोस्तों के लिए सुरा है; जब वे इसे पीते हैं, मदहोश हो जाते, जब वे मदहोश हो जाते हैं, हो जाते हैं वो शुद्ध, जब वो शुद्ध होते हैं, वे पिघल जायेंगे, जब वो पिघलते हैं, खाली और मुक्त हो जायेंगे वो, जब होंगे खाली, वो चाहेंगे, और जब चाहेंगे, वो पायेंगे, जब वे पायेंगे, वे जुड जायेंगे, और जब वो जुडेंगे, वो संगठित हो जायेंगे, जब होंगे संगठित, उनके और उन्हें चाहने वालों में तब कोई फर्क नहीं रह जायेगा।“ "

हज़रत अमील अल मोआमिन अली द्वारा
एकाग्रता
एकाग्रता, हमारे विचारों की ऊर्जा को एक ही बिन्दु पर ले आने की एक कला है। एकाग्रता के अभ्यास से हमें आंतरिक दबाव को बाहर निकालने और आनंद की स्थिती को पाने में मदद मिलती है। इससे हमारे जागरण की शक्ति भी बढ़ती है।

एकाग्रता का अभ्यास यदि नियमित रूप से किया जाए, तो यह आपके विद्युत चुंबकीय स्थिती व तरल को बढ़ाता है। इससे आपका स्वास्थ्य व सौन्दर्य वृद्घिगत होता है।.इस प्रकार के अभ्यास से आप भौतिक दुष्चिंताओं से दूर होकर स्वत्व का निर्माण पुनः कर सकते हैं।